✍️भारत आज विश्व की सबसे तेज़ी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। पिछले कुछ वर्षों में देश ने वैश्विक आर्थिक अस्थिरता, महामारी और भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद उल्लेखनीय आर्थिक मजबूती दिखाई है। मजबूत घरेलू मांग, डिजिटल विस्तार, आधारभूत ढाँचे में निवेश और वित्तीय स्थिरता ने भारतीय अर्थव्यवस्था को नई गति दी है। यही कारण है कि “विकसित भारत @2047” का लक्ष्य आज केवल एक राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय आकांक्षा बन चुका है। ◾हालाँकि, केवल उच्च आर्थिक वृद्धि दर किसी देश को विकसित राष्ट्र नहीं बनाती। यदि विकास के पीछे उत्पादकता, तकनीकी दक्षता और संसाधनों का प्रभावी उपयोग न हो, तो आर्थिक प्रगति लंबे समय तक टिकाऊ नहीं रहती। भारत की वर्तमान चुनौती यही है कि वह Growth-driven Economy से Productivity-driven Economy की ओर संक्रमण करे। ✒️केवल वृद्धि पर्याप्त क्यों नहीं? ◾GDP वृद्धि दर किसी अर्थव्यवस्था की गति को दर्शाती है, लेकिन यह हमेशा उसकी गुणवत्ता को नहीं बताती। कई बार अर्थव्यवस्था तेज़ी से बढ़ती दिखाई देती है, परंतु रोजगार, औद्योगिक क्षमता और आय वृद्धि उसी अनुपात में नहीं बढ़ते। भारत में भी य...
✍️भारत वर्ष 2047 तक “विकसित राष्ट्र” बनने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिये विनिर्माण, निर्यात, निवेश और रोज़गार के क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन आवश्यक हैं। विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) लंबे समय से भारत की निर्यात नीति के प्रमुख स्तंभ रहे हैं। इन्होंने विदेशी निवेश आकर्षित करने, उद्योगों को बढ़ावा देने तथा लाखों लोगों को रोज़गार उपलब्ध कराने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है।◾हलाँकि वर्तमान वैश्विक आर्थिक परिस्थितियाँ, बदलती व्यापार नीतियाँ, डिजिटल अर्थव्यवस्था का विस्तार तथा हरित विनिर्माण की बढ़ती आवश्यकता यह संकेत देती हैं कि पारंपरिक SEZ मॉडल में व्यापक सुधार की आवश्यकता है। अब समय केवल “निर्यात क्षेत्र” विकसित करने का नहीं, बल्कि ऐसे आर्थिक केंद्र बनाने का है जो भारत को वैश्विक उत्पादन और नवाचार शक्ति के रूप में स्थापित कर सकें। 🔵भारत में SEZ की भूमिका 1. निर्यात वृद्धि का आधार ◾विशेष आर्थिक क्षेत्रों ने भारत के निर्यात को गति देने में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है। ◾IT/ITES, फार्मास्यूटिकल्स और इंजीनियरिंग क्षेत्र ने निर्यात बढ़ाया। ◾भारत के कुल निर्यात में SE...