✍️ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2026 ने भारत में लैंगिक पहचान, गरिमा और अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण बहस को जन्म दिया है। यह विधेयक वर्ष 2019 के अधिनियम में बदलाव प्रस्तावित करता है, जो स्वयं सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक NALSA बनाम भारत संघ (2014) निर्णय के आधार पर बना था। जहाँ 2019 का कानून ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को स्व-पहचान का अधिकार देता था, वहीं 2026 का संशोधन इस मूल सिद्धांत को चुनौती देता हुआ दिखाई देता है। ✒️ चर्चा में क्यों? ◾सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत यह विधेयक ट्रांसजेंडर पहचान की प्रक्रिया, परिभाषा और प्रशासनिक ढाँचे में व्यापक परिवर्तन प्रस्तावित करता है। ट्रांसजेंडर समुदाय और अधिकार कार्यकर्ताओं को आशंका है कि ये बदलाव अधिकारों के विस्तार के बजाय उनके संकुचन की ओर ले जा सकते हैं। ✒️ विधेयक के प्रमुख प्रावधान 1. स्व-पहचान के अधिकार का समाप्त होना ◾विधेयक 2019 के अधिनियम की धारा 4(2) को हटाता है, जो ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को अपनी लैंगिक पहचान स्वयं निर्धारित करने का अधिकार देता था। अब पहचान के लिये चिकित्सा प्रमाणन अनि...