✍️भारतीय लोकतंत्र में महिलाओं की भूमिका पिछले कुछ वर्षों में तेज़ी से बदली है। अब वे केवल “मतदाता” नहीं रहीं, बल्कि चुनावी राजनीति की दिशा तय करने वाली एक निर्णायक शक्ति बन चुकी हैं। हाल ही में सामने आए आंकड़े—विशेषकर असम, केरल, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों के—यह स्पष्ट संकेत देते हैं कि महिलाओं की मतदान में भागीदारी लगातार बढ़ रही है, कई जगहों पर तो पुरुषों से भी अधिक हो गई है। इसके बावजूद, एक विडंबना बनी हुई है—विधानसभाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व अब भी बेहद सीमित है। ◾यह विरोधाभास ही आज के राजनीतिक विमर्श का केंद्र है: क्या भारत में महिलाएं केवल वोट बैंक बनकर रह जाएंगी, या वे नीति-निर्माण की सक्रिय भागीदार भी बनेंगी? Source - The Hindu ✒️ महिला मतदाताओं का उभार: एक नई राजनीतिक हकीकत ◾पिछले तीन दशकों के चुनावी रुझानों को देखें तो एक स्पष्ट बदलाव दिखाई देता है। 1990 के दशक में जहां महिलाओं की मतदान दर पुरुषों से काफी कम थी, वहीं अब स्थिति उलटती दिख रही है। ◾असम में 1991 में महिलाओं की भागीदारी पुरुषों से लगभग 1.48% कम थी, लेकिन 2021 तक यह अंतर उलटकर +0.41% हो गया। ◾केर...