✍️ ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल द्वारा जारी Corruption Perceptions Index (CPI) 2025 एक स्पष्ट संदेश देता है—भ्रष्टाचार कम नहीं हो रहा, बल्कि नए-नए रूपों में गहराता जा रहा है। इसका असर केवल शासन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करता है, निवेश के माहौल को प्रभावित करता है और समाज में विश्वास की नींव को हिलाता है। भारत जैसे उभरते हुए बड़े अर्थतंत्र के लिए यह संकेत गंभीर चिंतन की मांग करता है। ✒️वैश्विक परिदृश्य: गिरती पारदर्शिता ◾हालिया आंकड़े बताते हैं कि दुनिया के अधिकांश देशों में भ्रष्टाचार की धारणा बनी हुई है या बढ़ी है। औसत वैश्विक स्कोर में गिरावट इस बात का संकेत है कि पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में प्रगति ठहर गई है। बहुत कम देश ऐसे हैं जो उच्च स्कोर बनाए रख पाए हैं, जबकि अधिकांश देश 50 के नीचे ही हैं। ◾यह प्रवृत्ति बताती है कि जहां लोकतांत्रिक संस्थाएं कमजोर होती हैं और नागरिक स्वतंत्रताएं सीमित होती हैं, वहां भ्रष्टाचार और अधिक गहराता है। ✒️भारत की स्थिति: ठहराव की चुनौती ◾भारत का स्कोर और रैंकिंग यह दिखाते हैं कि पिछले एक दशक में सुधार सीमित रहा है। आर्...